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श्रीहरि: शरणम् ट्रस्ट, गुरुग्राम

एक मजबूत विचार ही किसी बड़ी संस्था या सफलता की नींव रखता है। इसलिए संगठन की स्पष्ट सोच और रचनात्मक शैली बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में अवश्य सफल होगी।

नींव रखने की दिलचस्प कहानी

ट्रस्ट के संस्थापक आचार्य अनिल जी (अनिल अहलावत) ने कई वर्ष पहले जरूरतमंद, बुजुर्ग और बेसहारा लोगों की मदद के लिए संकल्प लिया था जिसकी शुरुआत अन्न सेवा के रूप में जनवरी 2022 से हुई। यह शुरुआत दिलचस्प है। वर्ष 2019-20 की अवधि पूरी दुनियाँ के लिए करोना महामारी की चुनौतियों से भरी रही जिससे भारत देश भी अछूता नहीं रहा। इस अवधि में लोगों ने बहुत कुछ झेला और सहा। लेकिन बहुत लोगों, संगठनों और संस्थाओं ने जरूरतमंद लोगों की सभी प्रकार से मदद करने और सहयोग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मदद के नाम पर लोगों ने सेवा में खूब बढ़ चढ़ कर अपनी अपनी भागीदारी दी और इस मुश्किल घड़ी में सहयोग के लिए हाथ आगे बढ़ाए। इसी सेवा में आचार्य जी लगातार सहयोगी रहे।

यह बात सितंबर 2021 की है जब आचार्य जी अपने ऑफिस में परामर्श सेवा में थे। अश्वनी नंदा नाम के बिज़नेसमैन से उनकी वार्ता हो रही थी। आचार्य जी ने अपने अनुभव को शेयर करते हुए एक अन्य बिज़नेसमैन का उदाहरण दिया तो अश्वनी नंदा जी ने कहा कि- गुरूजी आपके साथ काफी लोग जुड़े हैं जिनका आप समय समय पर जिक्र तो करते हो लेकिन हम कभी इन लोगों से व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिले। तो क्यों न कोई ऐसा कार्य किया जाये जिसमें सेवा भी हो और इस माध्यम से सभी का मिलना भी हो। उसी समय आचार्य जी ने अन्न सेवा से इस सामाजिक कार्यक्रम का संकल्प लिया और रविवार, 02 जनवरी 2022 से अन्न सेवा का शुभारम्भ किया। शुरुआत में इसको एक गैर सरकारी संस्थान के रूप में और बाद में "श्रीहरिः शरणम् ट्रस्ट" के रूप में पंजीकृत करवाया।

आज ट्रस्ट अन्न सेवा के आलावा अन्य सामाजिक कार्यों जैसे जरूरतमंद के लिए शिक्षा सहयोग, चिकित्सा सेवा, पर्यावरण सुरक्षा, गौसेवा, कष्ट निवारण समागम, वैदिक ज्ञान प्रचार-प्रसार के कार्यों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।

वो कौनसी शक्ति है जो आधार बिंदु है...

भारत भगवान, देवी-देवता, गुरुओं, संत महात्मा और सिद्ध पुरुषों की भूमि रही है। जहाँ पर वेदों की वाणी (4 वेद, 13 उपनिषद, 6 वेदांत, 18 पुराण, 6 वेदांग और चार युगों की गाथाएँ) है। सत्युग का सत्य, त्रैतायुग का त्याग, द्वापर का धर्म/अधर्म युद्ध और कलयुग में नाम की महिमा (कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा।) का महात्म्य है। त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) की लीलाएँ/अवतार का वर्णन और तीन देवियों (सरस्वती-लक्ष्मी-काली) की महिमा बताई गई है। 51 शक्ति पीठ, 12 ज्योतिर्लिंग, 7 सप्तपुरी और 4 धाम का महात्म्य अनंत बताया गया हैं और इन सभी में बृजमण्डल सर्वोपरि है। बृजमण्डल में भी गोवर्धन में श्रीराधा कुंड की महिमा अनन्त है। सम्पूर्ण चराचर का केंद्र बिंदु -श्रीराधा कुंड है। जहाँ श्रीमती राधा रानी प्रत्यक्ष विरजमान रहती हैं। उनकी शक्ति ही हमारे प्राणों की आधार और हमारी ऊर्जा का आधार बिंदु है।

मूल संदेश ...

भगवत प्राप्ति ही मानव जीवन का पहला और अंतिम उद्देश्य है...

भगवान विष्णु को समस्त चराचर का पालनहार माना गया है। माँ लक्ष्मी जी सृष्टि को चलाने के लिए इनकी अर्धांगिनी स्वरूप में इनकी सहयोगी है। भगवान विष्णु ने अलग अलग समय पर, परिस्थितियों के अनुसार मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुए), वराह (सूअर), नर्सिंह (आधा शेर और आधा मनुष्य), वामन (बौने ब्राह्मण का रूप), परशुराम (क्रोधी योद्धा), श्रीराम (मर्यादा पुरुषोत्तम), श्रीकृष्ण (प्रेमावतार और गीता ज्ञान के प्रदाता) के रूप में अवतार लेकर मानव जीवन को संदेश दिया है। आने वाले समय में भगवान विष्णु का एक अवतार बाकी है- कल्कि अवतार, जो घोर कलियुग आने पर होगा।

एक सामान्य मनुष्य के शरीर में अधिकतम 5 से 8 कलाओं का तेज सहन करने की क्षमता होती है। भगवान श्री राम जी को 12 से 14 कलाओं वाला अवतार माना गया है। कई ग्रंथों में इन्हें 12 कलाओं (सूर्यवंशी होने के कारण सूर्य की 12 कलाओं के अनुरूप) और कुछ में 14 कलाओं से युक्त बताया गया है। भगवान श्री कृष्ण को पूर्ण अवतार माना जाता है क्योंकि इनमें पूरी 16 कलाएं थीं। इसके अलावा इन्होने गुरु सांदीपनि के आश्रम में 64 कलाओं की शिक्षा भी प्राप्त की थी।

इन्हीं भगवान विष्णु को भगवान 'श्रीहरि' या 'नारायण' भी कहा जाता है। इन्हीं भगवान श्रीहरि की शरण में जाना ही हर जीव के जीवन का उद्देश्य है। यही नारायण भगवान कृष्ण है। भगवान कृष्ण कहते है मेरे प्राणों की आधार श्रीमती राधा रानी है। जहाँ राधा वहाँ कृष्ण। भगवान श्रीहरि की शरण ही हमारे लिए "श्रीहरिः शरणम् ट्रस्ट" है। यही ट्रस्ट का संदेश है कि - "नर सेवा ही, नारायण सेवा।"

  • अन्न सेवा - Charitable Food

  • गौ रक्षा - Cow Protection

  • कष्ट निवारण समागम - Relief of Suffering

  • शिक्षा सहयोग - Educational Support

  • स्वास्थ्य सेवा - Medical Camp

  • पर्यावरण सुरक्षा - पौधारोपण Tree Plantation

  • वैदिक ज्ञान प्रचार-प्रसार - Vedic Dissemination

  • नागरिक जागरूक Citizens Awareness

ट्रस्ट के मुख्य कार्य/उद्देश्य :

OUR FAMILY

Meet the Team

A dedicated group of Volunteer medical professionals, therapists, and wellness experts committed to transformation.

Sh. Satish Pahuja

Honorable Member (Organizing Work)

Smt. Sushma Yadav

Honorable Member (Organizing Work)

Smt. Samriti Yadav

Cadre Member (Campaign Organizer)

Portrait of a male copywriter typing on a laptop next to a cup of espresso in a Scandinavian bakery context, surrounded by natural daylight.
Portrait of a male copywriter typing on a laptop next to a cup of espresso in a Scandinavian bakery context, surrounded by natural daylight.
Portrait of a friendly female client manager discussing marketing goals with a restaurant chef in an authentic open kitchen setting.
Portrait of a friendly female client manager discussing marketing goals with a restaurant chef in an authentic open kitchen setting.
Sh. Subhash Dalal

Cadre Member (Legal Advisor)

Sh. Shakti Singh

Cadre Member (Relationship Head)

Sh. Rakesh Singh

Cadre Member (Financial Advisor)

OUR PRODUCTS

ऑर्गेनिक उत्पादों के साथ वैदिक काल की झलक

वैदिक का अर्थ है प्राकृतिक। प्राकृतिक का अर्थ है जिसमें पांचों तत्वों का अनुपात। यह अनुपात ही हमारे जीवन को सुखद और खुशहाल बना सकता है तभी तो पश्चिम देश भी वैदिक और आर्गेनिक को अपना रहे हैं।